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जीवन की पहली यात्रा

 


 जीवन की पहली यात्रा.....

आप सभी  सोच रहे होंगे कि न जाने किस जगह की मैं बात करने जा रहा हूं। न जाने कौन ऐसी जगह है जहां आप गए हैं, किन्तु आप ही को नहीं पता है। डरिए नहीं! मैं बात करने जा रहा हूं , आप सभी की इस दुनिया में आने की यात्रा की। जी हां! हम सभी की अपनी मां की कोख से निकलने की यात्रा की।



आज ही मेरे पड़ोस में एक बच्चे का जन्म हुआ। जन्म सुबह 8:00 बज के 24 मिनट के आसपास हुआ। वह एक लड़का है। दिखने में बिल्कुल वैसा है जैसे सभी होते हैं। वही प्यारी सी मासूमियत, वह छोटे-छोटे हाथ- पैर , छोटा सा चेहरा, आंखें बंद, शरीर पूरा लाल और अपने इसी तेज से सब को मोहने वाला।
यह उस बच्चे की पहली यात्रा थी, इसी तरह हम सब की भी पहली यात्रा यही है। हम जब भी किसी यात्रा पर जाते हैं तो सबसे पहले अपने निज स्थान को छोड़ते हैं ठीक उसी प्रकार छोटा बच्चा भी अपने निज स्थान यानी अपनी मां की कोख को छोड़ देता है। निज स्थान को छोड़ने के बाद हम यात्रा का आनंद भी खुशी से लेते हैं क्योंकि हमें यह  पता होता है कि हमारी मंजिल पर ढेरों खुशियां है इसलिए हम अपने निज स्थान को छोड़ते वक्त जरा भी अफसोस नहीं करते किंतु वह छोटा बच्चा ऐसा नहीं कर पाता और नई जगह पर आते ही, नया माहौल पाते ही रोना शुरू कर देता है। उसके रोने में भी आनंद होता है। वह आनंद जो उसकी मां को मिलता है। और यह पहली और आखरी बार होता है जब एक मां अपने बच्चे के रोने पर खुश होती हैं उसके बाद- कभी नहीं! जैसे हम यात्रा का आनंद लेने के बाद अपने मंजिल पर आकर शांत हो जाते हैं वैसे ही वह छोटा बच्चा यात्रा में रोने के दौरान अपनी मंजिल यानी अपनी मां के गोद में आते ही शांत हो जाता है उसे पता होता है कि वह सुरक्षित है और सही हाथों में है। उस बच्चे का जन्म तो सुबह हुआ किंतु उसकी मां रात से ही प्रसव पीड़ा में थी। उसकी चीखने की आवाज रात भर मेरे कानों में आ रही थी। मैंने कहीं पढ़ा था कि प्रसव पीड़ा में 200 हड्डियां टूटने तक का दर्द होता है। हाय रे! इतना ज्यादा दर्द। न जाने कैसे एक औरत इतनी पीड़ा को सहती है न जाने कैसे उसे भगवान ने इतना सहनीय बनाया है। इसी पीड़ा के अंत के साथ एक बच्चे का तो जन्म होता ही है किंतु एक औरत का नया जन्म भी होता है - एक मां के रूप में। 

हास्पिटल से ठीक सुबह 11:00 बजे वह लोग अपने घर आ गए। पूरे घर में खुशी का माहौल छाया हुआ है। बच्चे के नानी-नाना, दादा-दादी, चाचा-चाची, मौसा-मौसी सभी उससे मिलने के लिए बहुत उत्सुक हैं और सभी घर पर आए हुए हैं।


यह हम सभी के जीवन की पहली यात्रा है। यह एक लंबे इंतजार के बाद छोटी सी यात्रा है, कठिन है लेकिन बहुत आनंदमय है। यह यात्रा जीवन में आने की है, जीवन जीने की है, जीवन को अपनाने की है। इस यात्रा के हम सभी साक्षी है। भले ही, हमें याद न हो।


- तुषार कुमार 


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